गंदगी को छुपाने की दौड़?
Wednesday, 23 November 2016
गंदगी को छुपाने की दौड़?
दोस्तों किस तरह से लोगों को बरगलाया जाता है और सच्चाई से उनको महरूम किया जाता है ये जानना हो तो आपको इंदौर और उज्जैन में होनी वाली मैराथन दौड़ों का उदाहरण दिया जाना सर्वदा उपयुक्त है। शहर में गंदगी पसरी है और नगर निगम लोगों को क्लीन सिटी दौड़ में दौड़वा दे और लोग...लोग भी ऐसे जो हर तरह से प्रदर्शन में आगे रहने वाले हों, तो शहर साफ हो न हो सफाई के लिये मैराथन दौड़ें तो लगती ही रहेंगी और शहर बद् से बद्तर होता जायेगा। मीडिया इसे गर्मागर्म तरीके से परोसेगी...मानों दौड़े-दौड़े जैसे अमिताभ बच्चन बच्चे ये जवान हो जाता है वैसे ही शहर भी क्लीन हो जायेगा। अभी ताजा मामला है जो मैं आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हूं वो है उज्जैन का। इंदौर ने पाखंड और झूठ की ये बीमारी अपने आसपास सभी जगह संक्रमक बीमारी की तरह फैला दी है...शर्मनाक। आइये देखें क्या हुआ महाकाल की नगरी में?
उज्जैन नगर के नगर निगम ने हाल ही में स्वच्छता को लेकर शपथ तथा दौड़ का आयोजन किया। महापौर से लेकर निगमायुक्त तक, सभापति से लेकर पार्षदों तक और अधिकारियों-कर्मचारियों ने शपथ ली। इधर इस शपथ के मायने वास्तव में सकारात्मक थे, तो शिप्रा तट पहुंचने वाले श्रद्धालु पूछ रहे हैं कि घाटों पर पसरी गंदगी को लेकर क्या मत है निगम के कर्णधारों का? इसलिए क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा के बाद पूरा सप्ताह गुजरने जा रहा है, नदी में, घाटों पर गंदगी, कचरे के ढेर लगे हुए हैं। बाहर से आनेवाले श्रद्धालु नाक-भौं सिकोड़कर ऐसी जगह ढूंढते हैं, जहां वे शिप्रा स्नान कर सकें। मवेशी पूजन, विसर्जन सामग्री जो कि घाटों पर पड़ी है, के समीप धींगा मस्ती करते देखे जा सकते हैं।
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